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आपको खुद को सुधारने की ज़रूरत नहीं है

  • Writer: Prashanth B
    Prashanth B
  • Jan 18
  • 2 min read

१. प्रस्तावना

"नमस्ते। बचपन से हमें एक ही बात बार-बार कही जाती है: 'तुम्हें और बेहतर बनना है,' 'तुम में ये कमी है,' 'तुम्हें खुद को सुधारना चाहिए।' सुबह उठने से रात को सोने तक, हम किसी न किसी Perfection के पीछे भाग रहे हैं।

लेकिन आज मैं आपको एक हैरान कर देने वाली बात बताना चाहता हूँ: आपको खुद को सुधारने या फिक्स (fix) करने की कोई ज़रूरत नहीं है। जी हाँ, आपने सही सुना। ये सुनने में अजीब लग सकता है क्योंकि दुनिया इसके बिल्कुल उल्टा सोचती है। लेकिन इस सच को समझने पर ही जीवन में असली शांति मुमकिन है।"


२. द्वंद्व: समस्या क्या है?

"हमने खुद को एक 'रिपेयर (repair) होने वाली चीज़' समझ लिया है। हम अपनी ही सहज भावनाओं के खिलाफ युद्ध छेड़ देते हैं—ये सोचकर कि 'मुझमें गुस्सा है, उसे ठीक करना है' या 'मुझमें डर है, उसे निकालना है।'

साइकोलॉजी (Psychology) और अध्यात्म की नज़र से देखें तो, आप जिस चीज़ का विरोध करते हैं, वो आपके अंदर और बढ़ती जाती है। जिस पल आप सोचते हैं कि आप 'सही नहीं हैं,' उसी पल से असंतोष और तनाव (stress) शुरू हो जाता है। इस दुनिया में कुछ भी परफेक्ट नहीं है, लेकिन सब कुछ अपने तरीके से एक संतुलन (balance) में है।"


३. बोध और स्वीकार

"ध्यान का मतलब खुद को बदलना नहीं है; बल्कि खुद को जैसा है वैसा ही जानना है। एक फूल खिलने के लिए ये नहीं सोचता कि उसे बदलना है, वो अपने स्वभाव में खिलता है।

जब हम अपने गुस्से, दर्द या उलझन को ठीक करने जाते हैं, तो हम खुद के ही दुश्मन बन जाते हैं। इसके बजाय, उन्हें सिर्फ ऑब्ज़र्व (observe) करना शुरू करें—'हाँ, इस वक्त मुझमें ये भावना है।' बदलाव ज़बरदस्ती नहीं आता, वो 'Awareness' (होश) से आने वाली एक सहज प्रक्रिया है। जब आप खुद को पूरी तरह स्वीकार (accept) कर लेते हैं, तो आपकी परेशानियाँ अपने आप पिघलने लगती हैं।"


४. अभ्यास: जीवन में कैसे उतारें?


"आज से एक छोटी सी कोशिश करें। जब आप आईने के सामने खड़े हों या अकेले बैठें हों, तो अपनी कमियों के बारे में मत सोचिए। आप वो भावनाएँ नहीं हैं... आप उन्हें जानने वाली 'Awareness' (होश) हैं। जब आप बिना किसी जजमेंट (judgment) के उन भावनाओं को सिर्फ रहने देते हैं, तो वो अपने आप पिಘलने लगती हैं—ठीक वैसे ही जैसे सूरज की किरणों में कोहरा (mist) गायब हो जाता है। और तब, एक सुकून मिलता है।

लेकिन याद रखिए, आप ये 'सुकून' भी नहीं हैं। भावनाएँ आती-जाती हैं... सुकून आता-जाता है... लेकिन आप वो Awareness हैं जो इन सबको जानती है। आप कोई फिक्स करने वाली चीज़ नहीं हैं, आप एक अद्भुत चेतना (consciousness) हैं जिसे जानना बाकी है। सुधारने की ज़िद छोड़िए, खुद को प्यार करना और जानना शुरू कीजिए। तभी आपके जीवन में असली बदलाव की हवा चलेगी।"



५. निष्कर्ष


"अगर आपको ये वीडियो पसंद आया, तो अपने विचार कमेंट में ज़रूर बताएँ। याद रखिए, आपको किसी और की तरह बनने की ज़रूरत नहीं है, आपका 'आप' होना ही काफी है। धन्यवाद।"



 
 
 

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